जिद कुछ कर दिखाने की

जिद कुछ कर दिखाने की

Friday, July 24, 2009

सच यानी सेक्‍स का सामना

क्‍या आप किसी पराए मर्द से शारीरिक संबंध बना सकती हैं, यदि आपके पति को पता न चले तो ?
क्‍या आपने कभी किसी महिला को अपना बच्‍चा गिराने के लिए कहा है ?
क्‍या आप ने अपनी बेटी से कम उम्र की महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं ?
क्‍या आप नाबालिग उम्र में अवैध संबंधों से गर्भवती हो गई ?
क्‍या आप लडकियों को किस करने लेडिज टायलेट में घुस जाया करते थे ?

आपको लग रहा होगा मैं कोई सी ग्रेड की एडल्‍ट मूवी की स्किप्‍ट लिख रहा हूं, या किसी अश्‍लील मैगजीन की कहानियों के विषय तैयार कर रहा हूंा नहीं, ये तो हिन्‍दुस्‍तान के करोडों घरों के बैठक रूम से गूंजती आवाजें हैं, दो सप्‍ताह से लाखों लोग परिवार के साथ टीवी पर इसे देख रहे हैं ा स्‍टार प्‍लस पर सच का सामना में परिवारों का सामना हुआ सिर्फ सेक्‍स से ा चूंकि सच आजकल बडी मुश्किल से सुनने को मिलता है, इसलिए बडी संख्‍या में लोग टीवी के सामने बैठ गए, उन्‍हें लगा गांधीजी, गौतम बुद़ध, महावीर या ईसा मसीह की तरह कोई सच का नया प्रयोग सामने आएगा, सच की सीख मिलेगी और कई बडे लोग अपनी जिंदगी की गलतियों को कबूल कर साहस दिखाएंगे ा पर बडी निराशा हाथ लगी, ऐसा सच जिसे सुनकर वे दाएं बांए झांकते हैंा

एक और बात शर्मिंदगी व मुंह छिपा लेने वाले उन सवालों के जवाब भी सामना करने वाला ऐसे सीना तानकर देता है मानो कोई तमगा हासिल किया हो ा उससे भी बढकर ऐसे कारनामों पर सामने बैठी उनकी मां, पत्‍नी और दोस्‍त भी ताली बजात हैं, मानो कह रहे हो वाह बेटा नाम रोशन कर दियाा एक ऐसा समाज जहां अस्‍सी फीसदी लोग आज भी अपनी पसंद की शादी की बात मां बाप से करने में शरमाते है, परिवार के सामने पत्नि के साथ एक सोफे पर बैठने में संकोच करते है, उस परिवेश में पति या पत्नि या बेटे की ऐसी लज्‍जाजनक स्‍वीकारोक्ति पर तालियां पीटना क्‍या कहा जाए ा

सच के इस खेल में ऐसे ही सवाल क्‍यों चुने जा रहे हैा, समझ से परे है, कांबली से बेडरूम के अलावा मैदान के तो उर्वशी ढोलकिया से सैक्‍स, शराब के अलावा उनके सीरियलों के रोल हथियाने पर और आल्विन डिसिल्‍वा जैसे मार्केटंिग एक्‍जिक्‍यूटिव से उसकी जिंदगी के दूसरे पहलू पर भी बात की जा सकती है ा यह सच समाज को नई दिशा देने के बजाए भटकाएगा ा पति पत्‍नी एक दूसरे को शक की निगाह से देखने लगेंगेा बच्‍चे मां बाप की सुनना बंद कर देंगे ा सबसे बढकर यह कार्यक्रम लोगों के बीच खासकर नई पीढी को यह संदेश देगा कि एक से अधिक औरतों से सबंध रखना गलत नहीं, देखिए इतने लोग ऐसे संबंध रखते है, टीवी में उन्‍होंने खुद स्‍वीकारा है, तो हम क्‍यों पीछे रहेंा संभव है कुछ दिनों बात ज्‍यादातर लोग ऐसे सबंधों का सडकों पर खुलासा करते फिरें, युवाओं को मौका मिलेगा यह कहने का कि हिंदुस्‍तानी समाज में भी यह सब जायज है ा क्‍या हम आने वाली पीढी को यह सीखा रहे है कि देखों गलत काम कोई भी करो पर उसको स्‍वीकार लो तो प्रायश्चित हो जाएगाा
धर्मग्रंथों ने भी हमें सीख दी है सच को स्‍वीकारो, सच को स्‍वीकारने से पाप धुल जाते हैं, पर सच को स्‍वीकारने के भी कुछ कायदे उनमें शामिल हैं ा हर काम का एक सलीका होता है ा हम कई गलत काम करते हैं, उसका प्रायश्चित या तो धर्मस्‍थल पर जाकर प्रभु के सामने करते हैं या जिसके साथ गलत काम किया उससे माफी मांगते है ा एक नियम यह भी है कि ऐसा सच जो किसी की जिंदगी को खतरे में डाल दे समाज के लिए संकट पैदा कर दे न बोला जाए तो ही बेहतर है ा सच हमेशा भलाई के लिए बोला जाता है, हम चर्च में फादर के सामने कन्‍फेस करते हैं, वह बात फादर और हमारे बीच खत्‍म हो जाती है कभी सुना है कि किसी फादर ने चर्च के बाहर किसी का सच उजागर कर दिया होा सच इतनी चकाचौंध से सार्वजनिक न किए जाए कि वे अपने पीछे घना अंधेरा छोड जाएं ा सच की स्‍वीकारोक्ति के पीछे प्रायश्चित हो केवल पैसा कमाने की लालसा न हो तभी वह सच हैा ऐसे गरिमाविहीन सच से तो सफेद झूठ अच्‍छा ा

15 comments:

varsha said...

sahi likha hai aapne.. yah kunthaon ko bechne ka adhkachra sach jaane kis darwaze se gharon ki baithak mein ghus aaya hai

दिनेशराय द्विवेदी said...

पंकज जी आप का ब्लाग देख कर अच्छा लगा। बधाई! चलिए इस बहाने इंटरेक्शन तो होता रहेगा।
अपने ब्लाग की टिप्पणियों पर से वर्डवेरीफिकेशन हटा लें तो बेहतर रहेगा। इस से टिप्पणीकर्ता को परेशानी होती है, कई बार वह टिप्पणी करना ही टाल देता है।

Udan Tashtari said...

सही कहा..एक महा फूहड़ कार्यक्रम!!

एक स्वतन्त्र नागरिक said...

many persons are giving arguments against this programme but there is one point also in favour of such programmes. there are many persons who live very simple life. they do not have any physical relation with anybody except their wife. they have not commiteed any crime. they live very peaceful and simple life. so they can stand against any question and can answer bravely but REAL QUESTION IS THAT DO PRODUCER ACCEPT SUCH PERSONS WHOSE LIFE IS FREE FROM SCANDALS AS TRP WILL ONLY INCERASE WHEN THERE IS INDECENCY, EXTRAMARITAL RELATIONS ETC NOT ONLY IN QUESTIONS AW WELL AS IN ANSWERS.

RAJNISH PARIHAR said...

आपकी बात तो सही है ! बेडरूम में झांकते.. ऐसे सच से क्या भला होगा!इन्हें तो ना बोलना ही अच्छा...!सच वो बोले जाये जो अनुकर्णीय हो...हेंसी क्रोनिए ने एक सच बोल कर क्रिकेट की काया ही बदल दी..!लेकिन इन सवालों से तो नुक्सान ही होना है!हमें जानने का हक है लेकिन ऐसे सच को शायद ही कोई जानना चाहेगा...!पाश्चात्य देशों से ग्रहण करने को बहुत कुछ है लेकिन हम है की बुराइयाँ ही लेना चाहते है..काहे को?

Anonymous said...

is tarah ke sach kabool karte waqt jo glaani hoti hai wo in logo ko nahi hoti. ye log 'aadhunik' hain, jitna sharmnaak kaam karenge utna seena fulaayenge. samasya ye hai ki bachche yah sab dekhkar galat baaten seekhenge. achcha mudda uthaya aapne.

Batangad said...

sahi hai

sandeep sharma said...

sahi likha...

राजीव तनेजा said...

हर इनसान की ज़िन्दगी में कुछ ऐसे पहलू होते हैँ जिन्हें वो सामने नहीं लाना चाहता ...इन्हीं की आड़ लेकर ये चैनल उन्हें भुना रहा है..

pradeep parihar said...

हर इंसान की जिंदगी में कुछ राज ऐसे होते है जिन्हें छुपाना ही बेहतर होता है
न जाने यह अश्लील शो , भारत में कितने के घर बर्बाद करेगा।,

manish joshi said...

यह शो समाज के एसे पहलू को उजागर कर रहा है जो सामने लाने से समाज के ठेकेदार डरते है. इसके सामने आने से नई जनरेशन इनसे यह सवाल करने लगेगी कि आप किस भारतीय सन्स्क्र्ती पर गर्व करते हो. ये हमारे समाज का वो सच है जो सदियो से सामने नही लाया जा रहा था. इस सच का सामना ने सामाज के इस पहलू से कुछ कचरा हटाया तो हमारी बरसो पुरानी सन्स्क्र्ती की नीव हिल गयी.
इस प्रोग्राम ने एक और बात बता दी कि पैसे के लिये हिन्दुस्तानी एसा सच भी बोल सकते है. जनाब असल मे हम हमारे समाज के सच का सामना नही कर रहे. हम इस सीरिअल को बन्द कराना चाहते है क्योकि हम डरते है कि कही हमारे बचचे हमारी लाइफ़ मे झाकने ना लगे.
और हा अगर यह सीरिअल पसन्द नही तो चेनल बदल ले जनाब..

Anonymous said...

महोदय
आपकी चिंता बिलकुल वाजिब है. आपत्ति सच को लेकर नहीं. सच को जिस खुले और नग्न स्वरुप में पेश किया जा रहा है उसको लेकर है. सच को स्वीकारने का साहस सभी में नहीं होता. लेकिन ऐसा सच जिसे सुनकर सुनने वाले का सर शर्म से झुक जाये उसे अगर राज़ ही रहने दिया जाए तो बेहतर है. मशहूर हस्तियों की जिंदगी के सच को जिस निर्लज्जता और बेशर्मी से छोटे परदे पर दिखाया जा रहा है वह केवल समाज में मानसिक प्रदुषण फैलाने का काम कर रहा है.ये प्रोग्राम सत्यम शिवम् सुन्दरम की कसौटी पर खरा नहीं उतरता. ऐसे प्रोग्राम को तत्काल प्रतिबंधित कर देना ही समाज के हित में है.

प्रदीप शुक्ल , भोपाल

satish rana said...

bilkul sahi baat likhi hai aapne..iss tarah ke programme hamari sanskriti ko puri tarah sharmshar kar rahe hai..or jo log iss programme me hissa le rahe hai wo sirf paisa banane ke liye le rahe hai agar unhi logon ko kaha jaye ki kuchh nahi milega to kya wo sacha ka samna kar payenge....kabhi nahi

Unknown said...

Unknown said...

kuch chijo me ek dayra hota hai jaise ki aurat ki ejjat ek parde me hoti hai agar wohi nahi rahta hai to ejjat bhi usi ke sath khatam ho jati hai. is show me bhi ek parde ko uthaya ja raha hai jo mere hisab se to sahi nahi hai